Forests were the first temples of the Divinity, and it is in the forests that men have grasped the first idea of architecture. - Francois-Rene de Chateaubriand,1802
उपलब्धि हेतु बाल अखड़ा को और प्रभावी बनाना होगा
|| बाल अखड़ा वार्षिक रिपोर्ट (2009-2010)||
झाड़खण्ड जंगल बचाओ आंदोलन बाल अखड़ा कार्यक्रम के चार वर्ष पूरे हो चुके हैं। 2009 तक बाल अखड़ा संख्या में तो 233 हो गई थी। शुरुआती दो-तीन वर्षों में जेजेबीए प्रभारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में गांव स्तर पर लगातार बाल अखड़ा का गठन करते चले गये। ..more..
वनमापन प्रशिक्षण : जंगल और जनता को बचाने के लिए जीपीएस का उपयोग हो
जेजेबीए द्वारा सराईकेला जिले के कुचाई प्रखण्ड अंतर्गत सोसोकड़ा गांव में जीपीएस मशीन से वन मापन का प्रशिक्षण चलाया गया। इस दौरान मुख्यतः तीन चीजों के बारे प्रशिक्षण दिया गयाः- जीपीएस, जीआईएस और पार्टिसिपेटरी 3-डी माॅडल। यह प्रशिक्षण 30 मार्च से 10 अप्रैल, 2010 तक चला जिसमें कुल 16 प्रतिनिधिनियों ने भाग लिया। ये प्रतिनिधि जंगल पर जनता के अधिकार को लेकर काम करने वाले संगठनों से थे। पश्चिम बंगाल से राष्ट्रीय वन जन श्रम जीवि मंच, डिवोट ट्रस्ट, परिवर्तन, सेवा जगत (तीनों उड़ीसा), छत्तीसगढ़ से परिवर्तन और झारखण्ड से झाड़खण्ड जंगल बचाओ आन्दोलन के प्रतिभागी शामिल हुए। ..more..
संताल आदिवासियों के बीच जनसभा
झाड़खण्ड जंगल बचाओ आंदोलन की ओर से गिरिडीह जिला के देउरी प्रखण्ड के फुटका गाँव में संताल आदिवासियों के बीच एक जनसभा हुई। इस दौरान जेजेबीए के प्रभारियों ने वनाधिकार कानून 2006 और उसे लागू करने की प्रक्रिया के बार विस्तारपूर्वक जानकारी दी। ..more..
एफडीए फंड से वनाधिकार आंदोलन को तोड़ने का प्रयास : राष्ट्रीय वन जन श्रमजीवी मंच की क्षेत्रीय बैठक
25 जून, 2010 को रांची के एचआरडीसी सभागार में वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन को लेकर झाड़खण्ड जंगल बचाओ आन्दोलन और राष्ट्रीय वन जन श्रमजीवी मंच के तत्वावधान में पूर्वी क्षेत्रीय मीटिंग आयोजित की गई। इसमें पश्चिम बंगाल, झारखण्ड और उड़ीसा के 21 प्रतिभागी भाग लिये। बैठक में वनाधिकार कानून के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति और भावी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। ..more..
:: Early Items ::
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The forests are dying, the rivers are dying, and we are called to act. To return Earth to harmony is to restore the harmonious principles within ourselves and to act as responsible caretakers - to save the forests and the waters for future generations. - Dhyani Ywahoo