Forests were the first temples of the Divinity, and it is in the forests that men have grasped the first idea of architecture. - Francois-Rene de Chateaubriand,1802
झारखण्डियों की जरूरत के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था जरूरी
- अमिता टुटी -
शिक्षा पर तीन दिवसीय कार्यशाला
झाड़खण्ड जंगल बचाओ आन्दोलन और क्राई की ओर से शिक्षा के मुद्दे को लेकर 24, 25 और 26 फरवरी 2010 को रांची के एचआरडीसी में कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान भारत में शिक्षा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और झारखण्ड के लिए अपेक्षित शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई। इसमें झाड़खण्ड जंगल बचाओ आन्दोलन के 45 प्रखण्ड प्रभारी भाग लिये। ..more..
आमंत्रण
जोहार ! नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ आपको हमंे यह बतलाते हुए खुशी हो रही है कि झाड़खण्ड जंगल बचाओ आन्दोलन का 7वां वार्षिक सम्मेलन रांची में हो रहा है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में झाड़खण्ड जंगल बचाओ आन्दोलन से जुड़े करीब 600 प्रतिनिधि भाग लेंगे। ..more..
जंगल बचाओ आंदोलन का वार्षिक सम्मेलन 16 नवंबर से
आपको सूचित करते हुए हमें खुशी हो रही है कि झाडखण्ड जंगल बचाओ आन्दोलन का वार्षिक सम्मेलन आगामी १७-१८ नवम्बर को हो रहा है। १७ नवम्बर को दिन के १२.०० बजे से ५.०० बजे शाम तक मोरहाबादी मैदान, रांची में रैली आयोजित है। ..more..
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The forests are dying, the rivers are dying, and we are called to act. To return Earth to harmony is to restore the harmonious principles within ourselves and to act as responsible caretakers - to save the forests and the waters for future generations. - Dhyani Ywahoo